हेन कि हइबे मोर–नर्म्मसखीगणे।अनुगत नरोत्तमे करिबे शासने॥
मैंने साधुओंके श्रीमुखकमलसे सुना है कि श्रीरूपगोस्वामीकी कृपासे ही राधाकृष्ण युगलके चरणकमलोंकी प्राप्ति होती है। हे श्रीसनातन गोस्वामी एवं श्रीमन्महाप्रभुके अन्य पार्षदवृन्द! आप सब लोग मिलकर कृपापूर्वक मेरी अभिलाषा पूर्ण कीजिए कि श्रीरूपगोस्वामीकी मुझपर भी कृपा हो जाए तथा वे मुझे अपने श्रीचरणोंमें आश्रय प्रदान करें। क्योंकि श्रीरूपगोस्वामीके श्रीचरणोंमें जिसे शरण प्राप्त हो जाती है, वे ही महात्मा धन्य हैं। श्रीनरोत्तमदास ठाकुर अभिलाषा करते हैं कि वह दिन कब आयेगा जब श्रीलोकनाथदास गोस्वामी मुझे अपने साथ ले जाकर श्रीरूपगोस्वामीके (श्रीरूपमञ्जरी) श्रीचरणोंमें समर्पित कर देंगे तथा श्रीराधाजीकी नर्मसखियाँ अपने अनुगत जानकर मुझपर शासन करेंगी।