Bhajana Gīti
Kirtan

श्रीगुरुदेव-प्रणाम

Śrīla Rūpa Gosvāmī1 min read
Guru TattvaKrishnaRadhaMahaprabhuNityanandaHarinam
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ॐ अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ 2॥

मैं, अपने श्रीदीक्षा गुरुदेव के शोभायमान चरणकमलों की वन्दना करता हूँ, एवं शिक्षा गुरुओं की तथा वैष्णवों की वन्दना करता हूँ ; श्री रूप गोस्वामी की तथा श्रीसनातन गोस्वामी की एवं उनके परिकर श्रीगोपालभट्ट गोस्वामी, श्रीरघुनाथभट्ट गोस्वामी, श्रीरघुनाथदास गोस्वामी एवं श्रीजीव गोस्वामी की वन्दना करता हूँ। श्रीअद्वैत आचार्य एवं श्रीनित्यानन्द प्रभु के परिकर सहित श्रीकृष्णचैतन्य महाप्रभु की वन्दना करता हूँ, और अपने गण के सहित ललिता-विशाखा आदि सखियों से युक्त श्रीराधाकृष्ण के पदारविन्दों की वन्दना करता हूँ। (1)

अज्ञानरूपी अन्धकार को ज्ञान-अंजन रूपी शलाका से आँखों को खोलने वाले श्रीगुरु जी के चरणकमलों में प्रणाम है। (2)

नामश्रेष्ठं मनुमपि शचीपुत्रमत्र स्वरूपं,रूपं तस्याग्रजमुरुपुरीं माथुरीं गोष्ठवाटीम्।राधाकुण्डं गिरिवरमहो ! राधिकामाधवाशां,प्राप्तो यस्य प्रथित-कृपया श्रीगुरुं तं नतोऽस्मि॥ 3 ॥

जिनकी अपार कृपा से मुझे इस जगत् में सब भगवन्नाम मन्त्रों में सर्वश्रेष्ठ श्रीहरिनाम और श्रीशचीनन्दन गौर हरि, श्रीस्वरूप दामोदर गोस्वामी, श्रीरूप गोस्वामी जी के बड़े भाई श्रीसनातन गोस्वामी, मथुरा धाम, श्रीगोकुल धाम एवं श्री वृन्दावन धाम, राधाकुण्ड, गोवर्धन पर्वत एवं श्रीराधामाधव जी की सेवा की आशा प्राप्त हुई, ऐसे श्रीगुरुदेव के चरणों में मैं नमस्कार करता हूँ।(3)

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