Bhajana Gīti
Kirtan

नमो नमः तुलसी महारानी (श्रीतुलसी-आरती)

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaRadhaBhakti
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नमो नमः तुलसी कृष्ण-प्रेयसी नमो नमः।(व्रजे) राधाकृष्ण-सेवा पाब एइ अभिलाषी॥
ये तोमार शरण लय, तार वान्छा पूर्ण हय।कृपा करि’ कर तारे वृन्दावनवासी॥
मोर एइ अभिलाष, विलासकुन्जे दिओ वास।नयने हेरिब सदा युगल रूप राशी॥
एइ निवेदन धर, सखीर अनुगत कर।सेवा - अधिकार दिये कर निजदासी॥
दीन कृष्णदासे कय, एइ येन मोर हय।श्रीराधा - गोविन्द प्रेमे सदा येन भासि॥

हे कृष्ण-प्रेयसी तुलसी जी! मैं ब्रज में श्रीराधा-कृष्ण जी की सेवा प्राप्त करूँ, इस अभिलाषा से आपको बार-बार प्रणाम करता हूँ। जो भी आपकी शरण लेता है, उसकी इच्छायें पूर्ण हो जाती हैं। आप कृपा करके मुझे वृन्दावनवासी बना दें। मेरी यही अभिलाषा है कि आप मुझे विलास-कुँज में वास दें, जिससे मैं हमेशा युगल रूप का अपने नेत्रों से दर्शन करता रहूँ। आप मेरा ये निवेदन स्वीकार कर लीजिये। मुझे सखियों के आनुगत्य में सेवा का अधिकार देकर अपनी दासी बना लीजिये। स्वयं को दीन कहते हुए श्रील कृष्णदास जी कहते हैं कि मेरी ये अभिलाषा जैसे पूर्ण हो जाये और मैं सदा श्रीराधा-गोविन्द जी के प्रेम में डूबा रहूँ।

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