Bhajana Gīti
Kirtan

सन्ध्या-आरती

Bhaktivinoda Ṭhākura1 min read
Guru TattvaKrishnaRadhaMahaprabhuBhakti
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जय जय राधाकृष्ण युगल-मिलन।आरती करये ललितादि सखीगण॥ 1॥
मदनमोहन रूप त्रिभंग सुन्दर।पीताम्बर शिखिपुच्छ-चूड़ा मनोहर॥ 2॥
ललितमाधव - वामे वृषभानु-कन्या।नीलवसना गौरी रूपे गुणे धन्या॥ 3॥
नानाविध अलंकार करे झलमल।हरिमनोविमोहन वदन उज्ज्वल ॥ 4॥
विशाखादि सखीगण नाना रागे गाय।प्रियनर्म-सखी यत चामर ढुलाय॥ 5॥
श्रीराधामाधव-पद - सरसिज-आशे।भक्तिविनोद सखीपदे सुखे भासे ॥ 6॥

श्रीराधा-कृष्ण जी के युगल मिलन की जय हो-जय हो। ललिता आदि सखियाँ उनकी आरती करती हैं। उनका मदन-मोहन त्रिभंग रूप बड़ा ही सुन्दर है। उन्होंने पीताम्बर धारण किया हुआ है। सिर पर मोर का पंख व मनोहर चूड़ा धारण किया हुआ है। वे जो ललित माधव हैं, उनके बायीं ओर गौर वर्ण वाली, नीले वस्त्र पहने, रूप व गुणों की धनी, वृषभानु महाराज की कन्या, श्रीमति राधिका जी विराजमान हैं। नाना प्रकार से सुशोभित अलंकार झलमल-झलमल कर रहे हैं तथा उनका उज्ज्वल श्रीमुख हरि के मन को भी विमोहित कर लेता है। विशाखा आदि सखियाँ नाना रागों से गा रही हैं तथा प्रियनर्म सखियाँ चामर ढुलाती हैं। श्रीराधा माधव जी के चरण-कमलों की आशा में भक्तिविनोद ठाकुर जी सखियों के चरण प्रान्त में रहकर सुख सागर में निमग्र हैं।

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