Bhajana Gīti
Kirtan

जय राधे जय कृष्ण

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaRadhaHarinamBhakti
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जय राधे, जय कृष्ण, जय वृन्दावन।श्रीगोविन्द, गोपीनाथ, मदनमोहन॥ 1॥
श्यामकुण्ड, राधाकुण्ड , गिरि-गोवर्धन।कालिन्दी यमुना, जय जय महावन॥ 2॥
केशीघाट, वंशीवट द्वादश - कानन।याँहा सब लीला कैल श्रीनन्दनन्दन॥ 3॥
श्रीनन्द - यशोदा जय, जय गोपगण।श्रीदामादि जय, जय धेनुवत्सगण॥ 4॥
जय वृषभानु, जय कीर्तिदासुन्दरी।जय पौर्णमासी, जय आभीर नागरी॥ 5॥
जय जय गोपीश्वर - वृन्दावन माझ।जय जय कृष्णसखा वटु द्विजराज॥ 6॥
जय रामघाट, जय रोहिणीनन्दन।जय जय वृन्दावनवासी यत जन॥ 7॥
जय द्विजपत्नी, जय नागकन्यागण।भक्तिते याँहारा पाइल गोविन्दचरण॥ 8॥
श्रीरासमण्डल जय, जय राधाश्याम।जय जय रासलीला सर्व मनोरम॥ 9॥
जय जयोज्ज्वल - रस सर्वरस - सार।परकीयाभावे याहा व्रजेते प्रचार॥ 10॥
श्रीजाह्नवा - पादपद्म करिया स्मरण।दीन कृष्णदास कहे नाम संकीर्तन॥ 11॥

श्रीमती राधिकाजी, श्रीकृष्ण, श्रीवृन्दावन धाम, श्रीगोविन्दजी, श्रीगोपीनाथ, श्रीमदनमोहन जी की जय हो। श्यामकुण्ड, राधाकुण्ड, गिरिराजजी, यमुनाजी, महावन, केशीघाट, वंशीवट, द्वादशकानन आदि स्थलियाँ जहाँ जहाँ श्रीनन्द-नन्दन नाना प्रकार की लीलाएँ करते हैं, उन सब लीला स्थलियों की जय हो। उनके अतिरिक्त कृष्ण के परिकर श्रीनन्दबाबा, श्रीयशोदा मैया, समस्त गोप, श्रीदाम आदि सखाओं एवं गोवत्सों की जय हो। श्रीवृषभानु महाराज, श्रीकीर्तिदासुन्दरी, श्रीपौर्णमासीजी की जय हो। वृन्दावन में श्रीगोपीश्वर महादेव तथा कृष्ण के सखा ब्राह्मण श्रेष्ठ मधुमंगलजी की जय हो। श्रीराम घाट, श्रीरोहिणीनन्दन तथा अन्यान्य वृन्दावनवासियों की जय हो। ब्राह्मण पत्नियों एवं नागकन्याओं की जय हो जिन्होंने भक्ति के द्वारा गोविन्द के श्रीचरणों को प्राप्त कर लिया है। श्रीरासमण्डल, श्रीराधाश्याम एवं अत्यन्त ही मनोरम रासलीला की जय हो। समस्त रसों के सारस्वरूप उज्ज्वल रस-मधुररस की जय हो जिसका पारकीय भावके रूप में ब्रज में प्रचार है। श्रीजाह्नवाजी के श्रीचरणकमलों का स्मरण कर यह दीन-हीन कृष्णदास नामसंकीर्तन कर रहा है।

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