Bhajana Gīti
Kirtan

एइबार करुणा कर चैतन्य

Locana Dāsa Ṭhākura1 min read
MahaprabhuNityanandaBhakti
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एइबार करुणा कर चैतन्य निताई।मो सम पातकी आर त्रिभुवने नाइ॥
मुञि अति मूढ़मति मायार नफर।एइ सब पापे मोर तनु जर-जर॥
म्लेच्छ अधम यत छिल अनाचारी।ता-सबा हइते बुझि मोर पाप भारी॥
अशेष पापेर पापी जगाइ-माधाइ।अनायासे उद्धारिले तोमरा दु’भाई॥
लोचन बले मो अधमे दया नैल केने।तुमि ना करिले दया के करिबे आने॥

हे श्रीचैतन्य महाप्रभु! हे नित्यानन्द प्रभु जी! इस बार मुझ पर करुणा कीजिये। मेरे समान पातकी इस त्रिभुवन में और कोई नहीं है। मैं बहुत ही मूढ़ मति वाला व माया का गुलाम हूँ। इन सब पापों के कारण ही मेरा ये शरीर एकदम जर्जरित सा हो गया है। म्लेच्छ व अधम जितने भी अनाचारी थे, मैं समझता हूँ कि उन सबसे मेरे पापों का भार ही ज्यादा है। अशेष पापों वाले पापी थे जगाई और माधाई। आप दोनों भाईयों ने अनायास में ही उनका भी उद्घार कर दिया। लोचन दास ठाकुर जी कहते हैं कि इतना होने के बावजूद भी मुझ अधम पर आपकी कृपा क्यों नहीं हो रही है — यदि आप दया नहीं करेंगे तो और कौन करेगा?

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