हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कलियुग प्रेमावतारी युगधर्म-प्रवर्तक श्रीचैतन्य महाप्रभु जी मधुर स्वर में गाते हैं — ‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥’ आप घर में रहो, चाहे जंगल में रहो — हमेशा हरि को पुकारते रहो। सुख में हो या दुःख में हो, कभी भी उन्हें मत भूलो, मुख से हरिनाम करते रहो। तुम मायाजाल में आबद्ध होकर फिज़ूल के कार्यों में व्यस्त हो — अभी भी चेत जाओ और राधा-माधव नाम का कीर्त्तन करो। श्रील भक्ति विनोद ठाकुर जी उपदेश देते हुए कहते हैं कि तुम्हारा जीवन खत्म हो गया तब भी तुमने हृषीकेश (इन्द्रियों के स्वामी) भगवान् श्रीकृष्ण का भजन नहीं किया, अरे कम-से-कम एक बार तो नाम रस में मत्त हो जाओ।