Bhajana Gīti
Kirtan

श्रील प्रभुपाद-प्रणाम

Śrīla Rūpa Gosvāmī1 min read
Guru TattvaKrishnaRadhaMahaprabhuBhakti
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नम ॐ विष्णुपादाय कृष्णप्रेष्ठाय भूतले।श्रीमते भक्तिसिद्धान्त-सरस्वतीति नामिने॥
श्रीवार्षभानवीदेवीदयिताय कृपाब्धये।कृष्णसम्बन्धविज्ञानदायिने प्रभवे नमः॥
माधुर्योज्जवलप्रेमाढ्य-श्रीरूपानुगभक्तिद।श्रीगौरकरुणाशक्तिविग्रहाय नमोऽस्तुते ॥
नमस्ते गौरवाणी श्रीमूर्त्तये दीनतारिणे।रूपानुगविरुद्धापसिद्धान्त - ध्वान्तहारिणे ॥ 6 ॥

भूतल में अवतीर्ण एवं श्रीकृष्ण के अतिशय प्रिय, ऊँ विष्णुपाद परमहंस 108 श्री श्रीमद् भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी नामक प्रभुपाद के लिये हमारा नमस्कार है। अकारण करुणावरुणालय-स्वरूप एवं वृषभानुनन्दिनी श्रीमती राधिकादेवी के प्रियभक्त, तथा श्रीकृष्ण के सम्बन्ध के विज्ञान को देने वाले प्रभुपाद के लिए हमारा नमस्कार है। मधुर रसाश्रित-उज्ज्वलप्रेम से युक्त श्रीरूप गोस्वामी की अनुगत भक्ति को देनेवाले, हे प्रभुपाद! आपके लिये हमारा नमस्कार है; क्योंकि आप श्रीगौरांगमहाप्रभु जी की कृपाशक्ति के विग्रहस्वरूप हो, एवं आप श्रीगौरांगदेव जी की वाणी के शोभायमान साकार रूप हो, दीनजनों का उद्धार करनेवाले हो, तथा श्रीरूप गोस्वामी के अनुगत भक्तों के विरुद्ध जो अपसिद्धान्तरूप-अन्धकार है, उसको हरने वाले हो, एवं गुणविशिष्ट शिष्टाग्रगण्य आपके लिये हमारा कोटिशः प्रणाम है। (6)

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