Bhajana Gīti
Kirtan

श्रीधाम-नवद्वीप-वन्दना

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
Bhakti
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श्रुतिश्छान्दोग्याख्या वदति परमं ब्रह्मपुरकं,स्मृतिर्वैकुण्ठाख्यं वदति किल यद्विष्णुसदनम्।सितद्वीपन्चान्ये विरलरसिकोऽयं ब्रजवनं,नवद्वीपं वन्दे परम - सुखदं तं चिदुदितम्॥ 28॥

श्रुतियाँ तथा छान्दोग्य आदि उपनिषदें जिसे भगवान का सर्वोत्तम धाम कहती हैं, स्मृति शास्त्र जिसे वैकुण्ठ कहते हैं, जो कि भगवान विष्णु जी का निवास स्थान है। श्वेत आदि द्वीपों का ये भाग शान्त, दास्य व सख्यादि रसों से परिपूर्ण श्रीवृजमण्डल ही है, ऐसे दिव्य तथा परम सुख देने वाले श्रीनवद्वीप धाम की मैं वन्दना करता हूँ। (28)

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