वृन्दावनावनिपते! जय सोम! सोममौले!सनक - सनन्दन - सनातन - नारदेङ्यगोपीश्वर ! व्रजविलासि-युगांघ्रि-पद्मेप्रीतिं प्रयच्छ नितरां निरूपाधिकां मे॥ 27॥
श्रीवृन्दावन धाम के रक्षक चन्द्रमौलि श्रीमहादेव जी की जय हो। आप सनक, सनन्दन, सनत कुमार व सनातन नामक चतुःसन के तथा श्रीनारद गोस्वामी जी के भी पूज्य हो। हे गोपीश्वर महादेव जी! आप कृपा करके मुझे भगवान श्रीकृष्ण जी के चरण कमलों में निरन्तर व अहैतुकी प्रीति प्रदान करें।(27)