Bhajana Gīti
Kirtan

श्रीतुलसी प्रणाम

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaBhakti
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भक्त्या विहीना अपराधलक्षैः, क्षिप्ताश्च कामादि तरंगमध्ये।कृपामयि! त्वां शरणं प्रपन्ना, वृन्दे! नुमस्ते चरणारविन्दम् ॥ 25॥
वृन्दायै तुलसीदेव्यै प्रियायै केशवस्य च।विष्णुभक्तिप्रदे देवि! सत्यवत्यै नमो नमः ॥ 26॥

हे कृपामयी देवी! हे वृन्दे! हम तुम्हारे चरणारविन्दों में भावपूर्वक प्रणाम करते हैं; क्योंकि हम सब श्रीहरिभक्ति से विहीन हैं, अतएव लाखों प्रकार के अपराधों से तथा काम व क्रोध आदि की दुस्तर समुद्रों की तरंगों के थपेड़े खा रहे हैं, अतः आपकी शरण में आ रहे हैं। (25)

वृन्दा एवं सत्यवती नामक तुलसीदेवी के लिये मेरा बारंबार प्रणाम है, तथा श्रीकृष्ण की प्रियतमा तुलसीदेवी के लिए मेरा बारंबार प्रणाम है। हे कृष्ण-भक्ति को देनेवाली तुलसीदेवी! आपके लिये मेरा बारंबार प्रणाम है।(26)

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