Bhajana Gīti
Kirtan

है लीपती आँगन नारि

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaGovinda DamodaraVraja
Study with Shastra AIPDF
है लीपती आँगन नारि कोई, गोविन्द आवे मम् गृह खेले।ध्यानस्थ में यही पद गा रही है, गोविन्द दामोदर माधवेति॥माता यशोदा हरि को जगावे, जागो उठो मोहन नैन खोलो।द्वारे खड़े ग्वाल बुला रहे हैं, गोविन्द दामोदर माधवेति॥विद्यानुरागी निज पुस्तकों में, अर्थानुरागी धन संचयों में।ये ही निराली ध्वनि गा रहे हैं, गोविन्द दामोदर माधवेति॥ले के करों में दोहनि अनोखी, गौ दुग्ध काढ़े अबला नवेली।गौ दुग्ध धारा संग गा रही है, गोविन्द दामोदर माधवेति॥जागे पुजारी हरि मन्दिरों में, जाके जगावें हरि को सवेरे।हे क्षीर सिन्धु अब नेत्र खोलो, गोविन्द दामोदर माधवेति॥सोया किसी का सुत पालने में, डोरी करों से जब खींचती है।हो प्रेम मग्ना उसने पुकारा, गोविन्द दामोदर माधवेति॥रोया किसी का सुत पालने में, हो प्रेम मग्ना उसने पुकारा।रोवो न गावो प्रभु संग मेरे, गोविन्द दामोदर माधवेति॥कोई नवेली पति का जगावे, प्राणेश जागो अब नींद त्यागो।बेला यही है हरि गीत गावो, गोविन्द दामोदर माधवेति॥

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