Bhajana Gīti
Kirtan

हे कृष्ण हे यादव

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaStotraBhakti
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गोविन्द दामोदर माधवेति-हे कृष्ण हे यादव हे सखेति॥माता यशोदा हरि को जगावे, जागो उठो मोहन नैन खोलो।द्वारे खड़े गोप बुला रहे हैं, गोविन्द दामोदर माधवेति।गोविन्द दामोदर माधवेति - हे कृष्ण हे यादव हे सखेति॥नारी, धराधाम, सुबन्धु प्यारे, सन्मित्र, सद्बान्धव, द्रव्य सारे।कोई न साथी, हरि को पुकारो, गोविन्द दामोदर माधवेति।गोविन्द दामोदर माधवेति - हे कृष्ण हे यादव हे सखेति॥नाता भला क्या जग से हमारा, आये यहाँ क्यों, कर क्या रहे हैं।सोचो-विचारो, हरि को पुकारो, गोविन्द दामोदर माधवेति।गोविन्द दामोदर माधवेति - हे कृष्ण हे यादव हे सखेति॥प्यारे जरा तो मन में विचारो, क्या साथ लाये, क्या ले चलोगे।जावे सदा संग यही पुकारो, गोविन्द दामोदर माधवेति।गोविन्द दामोदर माधवेति - हे कृष्ण हे यादव हे सखेति॥देहान्त काले, तुम सामने हो, वंशी बजाते, मनको लुभाते।गाता यही मैं, तन नाथ त्यागूँ, गोविन्द दामोदर माधवेति।गोविन्द दामोदर माधवेति - हे कृष्ण हे यादव हे सखेति॥सच्चे सखा हैं, हरि ही हमारे, माता-पिता शील सुबन्धु प्यारे।भूलो न भाई, दिन-रात गाओ, गोविन्द दामोदर माधवेति।गोविन्द दामोदर माधवेति - हे कृष्ण हे यादव हे सखेति॥हे कृष्ण हे यादव हे सखेति, गोविन्द दामोदर माधवेति।डारि मथानी दधि में किसी ने, तब ध्यान आयो दधि चोर का ही॥गद-गद कंठ पुकारती है, गोविन्द दामोदर माधवेति।हे कृष्ण हे यादव हे सखेति, गोविन्द दामोदर माधवेति।

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