Kirtan
दैनिक वन्दना
Bhaktivinoda Ṭhākura3 min read
Guru TattvaKrishnaRadhaMahaprabhuNityanandaHarinam
सपरिकर-श्रीहरि-गुरु-वैष्णव वन्दना
वन्देऽहं श्रीगुरोः श्रीयुतपदकमलं श्रीगुरून् वैष्णवांश्च,श्रीरूपं साग्रजातं सहगण - रघुनाथान्वितं तं सजीवम्।साद्वैतं सावधूतं परिजनसहितं कृष्णचैतन्यदेवं,श्रीराधाकृष्णपादान् सहगण-ललिता श्रीविशाखान्वितांश्च॥ 1॥
श्रीगुरुदेव-प्रणाम
ॐ अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ 2॥
श्रील माधव गोस्वामी महाराज-प्रणाम
नम ॐ विष्णुपादाय रूपानुग प्रियाय च।श्रीमते भक्तिदयितमाधवस्वामी - नामिने॥
कृष्णाभिन्न-प्रकाश-श्रीमूर्त्तये दीनतारिणे।क्षमागुणावताराय गुरवे प्रभवे नमः॥
सतीर्थप्रीतिसद्धर्म - गुरुप्रीति - प्रदर्शिने।ईशोद्यान - प्रभावस्य प्रकाशकाय ते नमः॥
श्रीक्षेत्रे प्रभुपादस्य स्थानोद्धार - सुकीर्तये।सारस्वत गणानन्द - सम्वर्धनाय ते नमः॥ 3 ॥
श्रील प्रभुपाद-प्रणाम
नम ॐ विष्णुपादाय कृष्णप्रेष्ठाय भूतले।श्रीमते भक्तिसिद्धान्त-सरस्वतीति नामिने॥
श्रीवार्षभानवीदेवीदयिताय कृपाब्धये।कृष्णसम्बन्धविज्ञानदायिने प्रभवे नमः॥
माधुर्योज्जवलप्रेमाढ्य-श्रीरूपानुगभक्तिद।श्रीगौरकरुणाशक्तिविग्रहाय नमोऽस्तुते ॥
नमस्ते गौरवाणी श्रीमूर्त्तये दीनतारिणे।रूपानुगविरुद्धापसिद्धान्त - ध्वान्तहारिणे ॥ 4 ॥
श्रील गौरकिशोर-प्रणाम
नमो गौरकिशोराय साक्षाद्वैराग्यमूर्त्तये ।विप्रलम्भरसाम्भोधे! पादाम्बुजाय ते नमः ॥ 5 ॥
श्रीलभक्तिविनोद-प्रणाम
नमो भक्तिविनोदाय सच्चिदानन्द-नामिने।गौरशक्तिस्वरूपाय रूपानुगवराय ते ॥ 6 ॥
श्रील जगन्नाथदास बाबाजी-प्रणाम
गौराविर्भावभूमेस्त्वं निर्देष्टा सज्जनप्रियः।वैष्णवसार्वभौम-श्रीजगन्नाथाय ते नमः॥ 7 ॥
श्रीवैष्णव प्रणाम
वाञ्छाकल्पतरुभ्यश्च कृपासिन्धुभ्य एव च।पतितानां पावनेभ्यो वैष्णवेभ्यो नमो नमः ॥ 8 ॥
श्रीगौरांगमहाप्रभु-प्रणाम
नमो महावदान्याय कृष्णप्रेमप्रदाय ते।कृष्णाय कृष्णचैतन्यनाम्ने गौरत्विषे नमः॥ 9॥
श्रीसम्बन्धाधिदेव प्रणामः
जयतां सुरतौ पंगोर्मम मन्दमतेर्गती।मत्सर्वस्वपदाम्भोजौ राधामदनमोहनौ॥ 10॥
श्रीअभिधेयाधिदेव-प्रणाम
दीव्यद्वृन्दारण्यकल्पद्रुमाधः, श्रीमद्रत्नागारसिंहासनस्थौ।श्रीश्रीराधा-श्रीलगोविन्ददेवौ, प्रेष्ठालीभिः सेव्यमानौ स्मरामि॥ 11॥
श्रीप्रयोजनाधिदेव-प्रणाम
श्रीमान् रासरसारम्भी वंशीवटतटस्थितः।कर्षण् वेणुस्वनैर्गोपीर्गोपीनाथः श्रियेऽस्तु नः॥ 12॥
श्रीतुलसी प्रणाम
वृन्दायै तुलसीदेव्यै प्रियायै केशवस्य च।विष्णुभक्तिप्रदे देवि! सत्यवत्यै नमो नमः ॥ 13॥
श्रीगुरु-परम्परा
कृष्ण हैते चतुर्मुख, हय कृष्ण-सेवोन्मुख, ब्रह्मा हैते नारदेर मति।नारद हइते व्यास, मध्व कहे व्यासदास, पूर्णप्रज्ञ पद्मनाभ-गति ॥
नृहरि माधव-वंशे, अक्षोभ्य परमहंसे, शिष्य बलि’ अंगीकार करे।अक्षोभ्येर शिष्य जय-तीर्थ नामे परिचय, ताँर दास्ये ज्ञानसिन्धु तरे॥
ताँहा हैते दयानिधि, ताँर दास विद्यानिधि, राजेन्द्र हइल ताँहा ह’ते।ताँहार किंकर जय - धर्म नामे परिचय, परम्परा जान भालमते॥
जयधर्म-दास्ये ख्याति, श्रीपुरुषोत्तम यति, ताँ’ ह’ ते ब्रह्मण्यतीर्थ सूरि।व्यासतीर्थ ताँर दास, लक्ष्मीपति व्यासदास, ताँहा ह’ ते माधवेन्द्रपुरी॥
माधवेन्द्रपुरीवर, शिष्यवर श्रीईश्वर, नित्यानन्द, श्रीअद्वैत विभु।ईश्वरपुरीके धन्य, करिलेन श्रीचैतन्य, जगद्गुरु गौरमहाप्रभु॥
महाप्रभु श्रीचैतन्य, राधा-कृष्ण नहे अन्य, रूपानुग जनेर जीवन।विश्वम्भर प्रियंकर, श्रीस्वरूपदामोदर, श्रीगोस्वामी रूप-सनातन ॥
रूपप्रिय महाजन, जीव-रघुनाथ हन, ताँर प्रिय कवि कृष्णदास।कृष्णदास प्रियवर, नरोत्तम सेवापर, याँर पद विश्वनाथ आश ॥
विश्वनाथ भक्तसाथ, बलदेव जगन्नाथ, ताँर प्रिय श्रीभक्तिविनोद।महाभागवतवर, श्रीगौरकिशोरवर, हरिभजनेते याँर मोद ॥
श्रीवार्षभानवीवरा, सदा सेव्य-सेवापरा, ताँहार दयितदास नाम।ताँहार परम प्रेष्ठ, रूपानुगजन श्रेष्ठ, माधव गोस्वामी गुणधाम ॥
श्रीभक्तिदयित ख्याति, सतीर्थ सज्जने प्रीति, दीन हीन अगतिर गति।एइ सब हरिजन, गौरांगेर निज जन, ताँदेर उच्छिष्टे मोर मति ॥
श्रीगुरुदेवाष्टकम्
संसारदावानललीढलोक - त्राणाय कारुण्यघनाघनत्वम्।प्राप्तस्य कल्याणगुणार्णवस्य, वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम्॥ 1॥
महाप्रभोः कीर्तन नृत्यगीत - वादित्रमाद्यन्मनसो रसेन।रोमाञ्चकम्पाश्रुतरंगभाजो, वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ 2॥
श्रीविग्रहाराधननित्यनाना, श्रृंगारतन्मन्दिरमार्ज्जनादौ।युक्तस्य भक्तांश्च नियुन्जतोऽपि, वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम्॥ 3॥
चतुर्विधश्रीभगवत्प्रसाद - स्वाद्वन्नतृप्तान् हरिभक्तसंघान।कृत्वैव तृप्तिं भजतः सदैव, वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम्॥ 4॥
श्रीराधिकामाधवयोरपार - माधुर्यलीलागुणरूपनाम्नाम्।प्रतिक्षणास्वादनलोलुपस्य, वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम्॥ 5॥
निकुन्जयूनो रतिकेलिसिद्ध्यै, या यालिभिर्युक्तिरपेक्षणीया।तत्रातिदाक्षादतिवल्लभस्य, वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम्॥ 6॥
साक्षाद्धरित्वेन समस्तशास्त्रै - रुक्तस्तथा भाव्यत एव सद्भिः।किन्तु प्रर्भोर्यः प्रिय एव तस्य, वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम्॥ 7॥
यस्य प्रसादाद् भगवत्प्रसादो, यस्याप्रसादान्न गतिः कुतोऽपि।ध्यायंस्तुवंस्तस्य यशस्त्रिसन्ध्यं, वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम्॥ 8॥
श्रीमद्गुरोरष्टकमेतदुच्चै -र्ब्राह्मे मुहूर्त्ते पठति प्रयत्नात्।यस्तेन वृन्दावननाथसाक्षात् , सेवैव लभ्या जनुषोऽन्त एव ॥ 9॥
श्रीवैष्णव वन्दना
वृन्दावनवासी यत वैष्णवेर गण।प्रथमे वन्दना करि सबार चरण॥ 1॥
नीलाचलवासी यत महाप्रभुर गण।भूमिते पड़िया वन्दों सभार चरण॥ 2॥
नवद्वीपवासी यत महाप्रभुर भक्त।सभार चरण वन्दों हैया अनुरक्त॥ 3॥
महाप्रभुर भक्त यत गौड़ देशे स्थिति।सभार चरण वन्दों करिया प्रणति॥ 4॥
ये-देशे ये-देशे वैसे गौरांगेर गण।ऊर्ध्वबाहु करि’ वन्दों सबार चरण॥ 5॥
हइयाछेन हइबेन प्रभुर यत दास।सभार चरण वन्दों दन्ते करि घास॥ 6॥
ब्रह्माण्ड तारिते शक्ति धरे जने-जने।ए वेद-पुराणे गुण गाय येबा शुने॥ 7॥
महाप्रभुर गण सब पतितपावन।ताइ लोभे मुईं पापी लइनु शरण॥ 8॥
वन्दना करिते मुईं कत शक्ति धरि।तमो-बुद्धि दोषे मुईं दम्भ मात्र करि॥ 9॥
तथापि मूकेर भाग्य मनेर उल्लास।दोष क्षमि मो-अधमे कर निज दास॥ 10॥
सर्ववाञ्छासिद्धि हय, यमबन्ध छुटे।जगते दुर्लभ हैया प्रेमधन लुटे॥ 11॥
मनेर वासना पूर्ण अचिराते हय।देवकीनन्दन दास एइ लोभे कय॥ 12॥