द्रुपदसुता की लाज बचायो, गज और ग्राह के फन्द छुड़ायो,ऐसे कृपाधाम को, बारम्बार प्रणाम है॥ 5॥
कुरु-पाण्डव को युद्ध मचायो, अर्जुन को उपदेश सुनायो,ऐसे दीन-नाथ को, बारम्बार प्रणाम है॥ 6॥
जय माधव, मदन मुरारि, राधे श्याम श्यामा-श्याम, जय केशव, कलिमलहारी। राधे श्याम..... सुन्दर-कुण्डल नैन विशाला, गल सोहे वैजन्तीमाला, या छवि की बलिहारी। राधे श्याम..... कबहुँ लूट-लूट दधि खायो, कबहुँ मधुवन रास रचायो, नाचत विपिनबिहारी। राधे श्याम..... ग्वालबाल संग धेनु चराई, वन वन भ्रमत फिरे यदुराई, काँधे कामर कारी। राधे श्याम..... चुरा चुरा नवनीत जो खायो, व्रज-वनितन पै नाम धरायो, माखनचोर मुरारि। राधे श्याम..... इक दिन मान इन्द्र को मारो, नख ऊपर गोवर्धन धारो, नाम पड़ो गिरिधारी। राधे श्याम..... दुर्योधन को भोग न खायो, रूखो साग विदुर घर खायो, ऐसे प्रेम पुजारी। राधे श्याम..... करुणा कर द्रौपदी पुकारी, पट में लिपट गये बनवारी, निरख रहे नर नारी। राधे श्याम.....