Bhajana Gīti
Kirtan

सब तजि

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KrishnaSurrenderSurdas
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सब तजि भजिए नन्दकुमार।और भजे तैं काम सरै नहिं, मिटै न भव - जंजाल॥ 1॥जिहिं जिहिं जौनि जन्म धारयौ, बहुत जोरयौ अघ कौ भार।तिहि काटन कौं समरथ हरि कौं, तीछन नाम-कुठार॥ 2॥वेद, पुरान, भागवत, गीता, सब कौ यह मत सार।भव-समुद्र हरि-पद-नौका, बिनु कोऊ न उतारै पार॥ 3॥यह जिय-जानि, इन्हीं छिन भजि, दिन बीते जात असार।सूर पाइ यह समौ लाहु लहि, दुर्लभ फिरि संसार॥ 4॥

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