नादान समझ ले जी में तू, इक रोज तो तुझको जाना है।यह मानुष जन्म दोबारा लेकर, फिर तुझको नहीं आना है॥
तू कहता मेरा मेरा है, यह मोह माया का घेरा है।उठ जाग अभी सवेरा है, नहीं फिर पीछे पछताना है।दुनियाँ से प्रीत उठा ले तू , ईश्वर से प्रीत बढ़ा ले तू॥
भगवान का नाम जरा ले तू , नाम से प्रीत बढ़ाना है।