धन्य कलि तेरा तमाशा, दुःख लगे और हाँसी,सच्चा कहे तो मारे लट्ठा, झूठा जगत् भुलाये।गोरस गली गली फिरे, सुरा बैठत बिकाये॥ 1॥
दूध दुह कर कुत्ता पाले, बछड़ा रहे भूखा।साले को उत्तम खिलावे, बाप न पावे रूखा॥ 2॥
घर की बौहरी प्रीत ना पावे, चित्त चुराये दासी।धन्य कलि तेरा तमाशा, दुःख लगे और हाँसी॥ 3॥
चोर को छोड़े, साध को बाँधे, पथिक को लगाये फाँसी।धन्य कलि तेरा तमाशा, दुःख लगे और हाँसी॥ 4॥