Bhajana Gīti
Kirtan

सोइ रसना जो

Sūradāsa1 min read
KrishnaHarinamSurdas
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सोई रसना जो हरिगुन गावै।नैनन की छबि यहै चतुरता, जो मुकुन्द-मकरन्दहि ध्यावै॥ 1॥निर्मल चित्त तौ सोई साँचो, कृष्ण बिना जिय और न भावै।श्रवनन की जु यहै अधिकाई, सुनि हरि-कथा सुधा-रस पावै॥ 2॥कर तेई जे स्यामहि सेवैं, चरननि चलि वृन्दावन जावै।सूरदास जैये बलि ताके, जो हरि जू सों प्रीति बढ़ावै॥ 3॥

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