Bhajana Gīti
Kirtan

जगत में कोई

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
Bhakti
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जगत में कोई नहिं तेरा रे।छाड़ वृथा अभिमान, त्याग दे मेरा - मेरा रे॥ 1॥
काल कर्म बस जग-सराय, बिच कीन्हा डेरा रे।इस सराय में सभी मुसाफिर, रैन-बसेरा रे॥ 2॥
जिस तन को तू सदा सँवारे, साँझ-सवेरा रे।इक दिन मरघट पड़े, भस्म का होकर ढेरा रे॥ 3॥
मात - पिता, भ्राता, सुत-बान्धव, नारी चेरा रे।अन्त न होय सहाय, काल जब दैवे घेरा रे॥ 4॥
जग का सारा भोग सदा, कारन दुःख केरा रे।भज मन हरि का नाम, पार हो भव-जल बेरा रे॥ 5॥
दीनदयालु भक्तवत्सल, हरि मालिक तेरा रे।दीन होय उनके चरनों में, कर ले डेरा रे॥ 6॥

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