Bhajana Gīti
Kirtan

अब मैं शरण

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KrishnaSurrenderMirabai
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अब मैं शरण तिहारी जी, मोहे राखो कृपानिधान।अजामिल अपराधी तारे, तारे नीच सदान।जल डूबत गजराज उबारे, गणिका चढ़ी विमान॥और अधम तारे बहुतेरे, भाखत सन्त - सुजान।कुब्जा नीच भीलनी तारी, जाने सकल जहान॥कहँ लग कहूं गिणत नहिं आवे, थकि रहे वेद-पुराण।मीरा दासी शरण तिहारी, सुनिये दोनों कान॥

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