Bhajana Gīti
Kirtan

रे मन, कृष्णनाम करि

Sūradāsa1 min read
Guru TattvaKrishnaBhakti
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रे मन , कृष्णनाम करि लीजै।गुरु के वचन अटल करि मानहि, साधु समागम कीजै॥ 1॥
पढ़िये गुनिये भगति भागवत, और कहा कथि कीजै।कृष्ण-नाम बिनु जन्म बादिही, बिरथा काहे कीजै॥ 2॥
कृष्णनाम रस बह्यो जात है, तृष्णावन्त है पीजै।सूरदास हरिसरन ताकिये, जनम सफल करि लीजै॥ 3॥
जो सुख होत गोपालहि गाये।सो सुख होत न जप तप कीन्हें, कोटिक तीर्थ नहाये॥ 1॥
दिये लेत नहिं चार पदारथ, चरन-कमल चित लाये।तीनि लोक तृन सम करि-लेखत, नन्द-नन्दन उर आये॥ 2॥
वंशीवट, वृन्दावन, यमुना, तजि वैकुण्ठ न जाये।सूरदास हरि को सुमिरन करि, बहुरि न भव-जल आये॥ 3॥
सब तजि भजिए नन्दकुमार।और भजे तैं काम सरै नहिं, मिटै न भव - जंजाल॥ 1॥
जिहिं जिहिं जौनि जन्म धारयौ, बहुत जोरयौ अघ कौ भार।तिहि काटन कौं समरथ हरि कौं, तीछन नाम-कुठार॥ 2॥
वेद, पुरान, भागवत, गीता, सब कौ यह मत सार।भव-समुद्र हरि-पद-नौका, बिनु कोऊ न उतारै पार॥ 3॥
यह जिय-जानि, इन्हीं छिन भजि, दिन बीते जात असार।सूर पाइ यह समौ लाहु लहि, दुर्लभ फिरि संसार॥ 4॥

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