Bhajana Gīti
Kirtan

मो सम कौन कुटिल

Sūradāsa1 min read
KrishnaDainyaSurdas
Study with Shastra AIPDF
मो सम कौन कुटिल खल कामी।जिन तनु दियो ताहि विसरायो, ऐसौ नमक - हरामी॥ 1॥भरि भरि उदर विषय को धायो, जैसे सूकर-ग्रामी।हरिजन छाँड़ि हरि विमुखन की, निशि-दिन करत गुलामी॥ 2॥पापी कौन बड़ो जग मोते सब पतितन में नामी।सूर पतित को ठौर कहाँ है, तुम बिन श्रीपति स्वामी॥ 3॥

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