अब तो माधव मोहे उबार।दिवस बीते रैन बीते, बार बार पुकार॥ 1॥नाव है मझधार भगवन्, तीर कैसे पाये।घिरि है घनघोर बदली, पार कौन लगाये॥ 2॥काम क्रोध समेत तृष्णा रही है पल-छिन घेर।नाथ दीना-नाथ कृष्ण, मत लगाओ देर॥ 3॥दौड़ कर आये बचाने, द्रौपदी की लाज।द्वार तेरा छोड़कर, किस दर जाऊँ आज॥ 4॥