Bhajana Gīti
Kirtan

हरिनाम सुमर सुख

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaHarinamBhakti
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हरिनाम सुमर सुख पायेगा, मत भूल मनुष्य पछतायेगा,यह तेरा मेरा झूठा है, तू हरि का है, हरि तेरा है।हरिबोल से ही तर जायेगा, मत भूल मनुष्य पछतायेगा॥ 1॥
सुत मात पिता भ्राता बन्धु, इन सबसे बड़ा करुणासिन्धु।जो अन्तिम साथ निभायेगा, मत भूल मनुष्य पछतायेगा॥ 2॥
धन जन यौवन पर फूल रहा, झूठे जीवन पर भूल रहा।ये फूल तेरा कुम्हलायेगा, मत भूल मनुष्य पछतायेगा॥ 3॥
अब तो माधव मोहे उबार।दिवस बीते रैन बीते, बार बार पुकार॥ 1॥
नाव है मझधार भगवन्, तीर कैसे पाये।घिरि है घनघोर बदली, पार कौन लगाये॥ 2॥
काम क्रोध समेत तृष्णा रही है पल-छिन घेर।नाथ दीना-नाथ कृष्ण, मत लगाओ देर॥ 3॥
दौड़ कर आये बचाने, द्रौपदी की लाज।द्वार तेरा छोड़कर, किस दर जाऊँ आज॥ 4॥

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