Bhajana Gīti
Kirtan

प्रबल प्रेम के पाले

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaBhakti
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प्रबल प्रेम के पाले पड़कर , हरि का नियम बदलते देखा।अपना मान भले टल जाये, पर भक्त का मान न टलते देखा॥
जिनकी केवल कृपादृष्टि से, सभी सृष्टि को पलते देखा,उनको गोकुल के गोरस पर, सौ-सौ बार मचलते देखा॥
जिनके चरण-कमल कमला के, करतल से न टलते देखा,उनको ब्रज कराल कुन्जन में, कंटक पद पर चलते देखा।जिनका ध्यान शुक - सनकादि से न सम्भलते देखा,उनको ग्वाल - बाल संग में, लेकर गेंद उछलते देखा॥
जिनक ी बंक भृकुटि के भय से, सागर सप्त उछलते देखा,उनको यशोदाजी के भय से, सौ-सौ बार बिलखते देखा॥

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