व्रज-जन मनसुखकारी।राधे-श्याम श्यामा-श्याम॥मोर मुकुट मकराकृत कुण्डल, गल वैजयन्तीमाल।चरणन नूपुर रसाल, राधे........सुन्दर वदन कमलदल लोचन, बाँकी चितवनहारी।मोहन वंशी विहारी। राधे .........वृन्दावन में धेनु चरावे, गोपीजन मनहारी।श्रीगोवर्धनधारी। राधे ..........राधा-कृष्ण मिलि अब दोऊ, गौर रूप अवतारी।कीर्तन धर्म प्रचारी। राधे .......तुम बिन मेरे और न कोई, नामरूप अवतारी।चरणन में बलिहारी। राधे ........
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Kirtan
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मंगलाचरण (सपरिकर-श्रीहरि-गुरु-वैष्णव वन्दना)
वन्देऽहं श्रीगुरोः श्रीयुतपदकमलं श्रीगुरून् वैष्णवांश्च,
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श्रीगुरुदेव-प्रणाम
ॐ अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
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नमः ॐ विष्णुपादाय (श्रील तीर्थ महाराज)
नमः ॐ विष्णुपादाय श्रीगौरप्रियमूर्तये।
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