Kirtan
श्रीगौर-गोपाल कीर्तन
Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaRadhaMahaprabhuHarinamBhakti
सुन्दर लाला शचीर-दुलाला, नाचत श्रीहरि कीर्त्तन में।भाले चन्दन तिलक मनोहर, अलका शोभे कपाल में॥ 1॥
शिरे चूड़ा दरश निराले, वन फूलमाला हिया पर दोले।पहिरन, पीत-पीताम्बर शोभे, नूपुर रुणु-झुनु चरणन में॥ 2॥
कोई गायत है राधा-कृष्ण नाम,कोई गायत है हरिगुण गान।मृदंग ताल मधुर रसाल, कोई गायत है रंग में॥ 3॥
जय गौरहरि जय गौरहरि जय गौरहरि जय गौरहरि ।जय गौरहरि जय गौरहरि जय गौरहरि जय गौरहरि ॥
कीर्त्तनकारी, नदिया बिहारी, स्वयं अवतारी गौरहरि ।भाव-रसधारी, पतित उद्धारी, भव दुःखहारी गौरहरि॥
रूप रसाला, नयन विशाला, परम कृपाला गौरहरि॥
दीन दयाला, प्रणतपाला, शचीर-दुलाला गौरहरि॥