Kirtan
श्रीगुरु-चरणकमल भज
Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
Guru TattvaKrishnaRadhaMahaprabhuHarinamBhakti
श्रीगुरु-चरणकमल भज मन,गुरु-कृपा बिना नहीं कोई साधन बल, भज मन भज-अनुक्षण॥ 1॥
श्रीगुरु-चरणकमल भज मन,मिलता नहीं ऐसा दुर्लभ जन्म, भ्रमत ही चौदह भुवन।किसी को मिलते हैं अहोभाग्य से, हरिभक्तों के दर्शन॥ 2॥
श्रीगुरु-चरणकमल भज मन,कृष्ण कृपा की आनन्द मूर्ति, दीनन करुणानिधान।ज्ञान - भक्ति - प्रेम तीनों प्रकाशित, श्रीगुरु पतितपावन॥ 3॥
श्रीगुरु चरणकमल भज मन,श्रुति-स्मृति इतिहास सभी मिले, देखत स्पष्ट प्रमाण।तन - मन जीवन गुरु - पदे अर्पण, सदा श्रीहरिनाम रटन॥ 4॥
और कौन है ऐसा प्रभु दयालु महान।प्रेमदाता शिरोमणि पतितपावन॥ 1॥
गोलोकधाम में बैठत जो है।भक्तों के चित्तहारीनदीया में अब प्रकटे सो है।अपने प्रेम-भिखारी॥ 2॥
भाव-मग्न सदा नाचत रंगे।नाम अनुक्षण भक्तों के संगेभ्रमत गौरहरि प्रेम तरंगे।देखत जग जन पुलकित अंगे॥ 3॥
पापी-तापी-नीच छोड़त नांहि।व्रज-प्रेम बांटत देखत जो हीराधा माधव जू का देहो प्रसाद।श्रीचैतन्य गोसाईं ॥ 4॥