Bhajana Gīti
Kirtan

हे मेरे गुरुदेव करुणा

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
Guru TattvaBhakti
PDF
हे मेरे गुरुदेव करुणा सिन्धु करुणा कीजिये।हूँ अधम, अधीन, अशरण, अब शरण में लीजिये॥
खा रहा गोते हूँ मैं, भव-सिन्धु के मंझधार में।आसरा है दूसरा कोई, न इस संसार में॥
मुझमें है जप तप न साधन, और नहीं कुछ ज्ञान है।निर्लज्जता है एक बाकी, और बस अभिमान है॥
पाप बोझे से लदी, नैया भंवर में जा रही।नाथ दौड़ो अब बचा लो, जल्दी डूबी जा रही॥
आप भी यदि छोड़ दोगे, फिर कहाँ जाऊँगा मैं।जन्म - दुःख से नाव कैसे पार कर पाऊँगा मैं॥
सब जगह मैंने भटक कर, अब शरण ली आपकी।पार करना या न करना, दोनों मरज़ी आपकी॥
हे मेरे गुरुदेव करुणा सिन्धु करुणा कीजिये।हूँ अधम, अधीन, अशरण, अब शरण में लीजिये॥

Continue the Journey