राधे! जय जय माधवदयिते।गोकुल-तरुणी मण्डल-महिते॥ध्रु0॥
दामोदर - रति - वर्धन - वेशे।हरिनिष्कुट - वृन्दाविपिनेशे॥ 1॥
वृषभानुदधि - नवशशिलेखे।ललितासखी! गुणरमितविशाखे॥ 2॥
करुणां कुरु मयि करुणाभरिते।सनक सनातन - वर्णित - चरिते॥ 3॥
हे माधव - प्रिये! हे गोकुल-तरुणीपूजिते! हे कृष्ण की रतिवर्द्धन- वेशधारिणी ! हे नन्दनन्दन के गृहोद्यानरूप वृन्दावन की अधीश्वरि! हे श्रीराधिके! तुम्हारी जय हो जय हो। श्रीवृषभानु महाराजरूप समुद्र से उदित नवचन्द्रकला रूपिणि! हे ललिता की प्रियसखी! हे विशाखा के लिए सुखकर सौहार्द-कारुण्य- कृष्णानुकूल्यादि गुणों के द्वारा विशाखा को वशीभूतकारणि! हे कृपापूर्णे ! हे सनक-सनन्दन-सनातन द्वारा वर्णित चरितोंवाली श्रीराधे! तुम्हारी जय हो जय हो। तुम मेरे प्रति करुणा करो। श्रीकृष्णाय नमः