Bhajana Gīti
Kirtan

श्रीअद्वैत-प्रणाम

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaBhakti
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महाविष्णुर्जगत्कर्ता मायया यः सृजत्यदः।तस्यावतार एवायमद्वैताचार्य ईश्वरः॥
अद्वैतं हरिणाद्वैताचार्यं भक्तिशंसनात्।भक्तावतारमीशं तमद्वैताचार्यमाश्रये ॥ 13॥

जगत् की सृष्टि करने वाले महाविष्णु , जो माया के द्वारा इस ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति करते हैं— श्री अद्वैत-आचार्य जी उनके की अवतार हैं। श्री हरि से अभिन्न होने के कारण जिनका नाम अद्वैत है, एवं श्रीकृष्ण-भक्ति का उपदेश करने से जिन्हें आचार्य कहा गया है; उन भक्तावतार ईश्वर श्रीअद्वैताचार्य जी की मैं शरण ग्रहण करता हूँ।(13)

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