श्रीप्रभुपादपद्मस्तवकः
मैं कोटि-कोटि सज्जनों के द्वारा आराधित, कृष्ण-संकीर्तन युग-धर्म के संस्थापक, विश्ववैष्णव राजसभा के पात्रराज अर्थात् अधिकारीवर्ग में श्रेष्ठतम, निखिल जीवों के भय दूर करनेवालों की भी मनोकामना पूर्ण करनेवाले, सर्वपूज्य उन श्रील प्रभुपाद के श्रीचरणकमलों में मैं सदा-सर्वदा प्रणाम करता हूँ।(1)
जो भजन-सम्पन्न सज्जन-वृन्दों के अधिपति हैं, जो पतितजनों के प्रति अति करुणामय तथा उनकी एकमात्र गति हैं एवं जो वञ्चकों के भी वञ्चक हैं, मैं उन श्रीलप्रभुपाद के अचिन्त्य चरणकमलों में सदा-सर्वदा प्रणाम करता हूँ।(2)
अतिकोमल काञ्चनवर्णवाले सुदीर्घ तनु , जिसके द्वारा स्वर्णमय कमलनालों की मत्तता (सौन्दर्य )भी निन्दित होती है, जिन नख-चन्द्रों की वन्दना कोटि-कोटि कामदेव करते हैं, मैं उन श्रील प्रभुपाद के श्रीचरणकमलों में सदा-सर्वदा प्रणाम करता हूँ। (3)
जो नक्षत्र-मण्डल को रंजित करने वाले चन्द्र की तरह सेवक-मण्डली द्वारा परिवेष्टित होकर उनके चित्त को प्रफुल्लित रखते हैं, भक्ति-विद्वेषीजन जिनके सिंहनाद से भयभीत रहते हैं एवं निरीह व्यक्ति जिनके चरणकमलों का आश्रय ग्रहणकर परम-कल्याण लाभ करते हैं, मैं उन श्रील प्रभुपाद के श्रीचरणकमलों में सदा-सर्वदा प्रणाम करता हूँ ।(4)
जिन्होंने श्रीगौरधामका (श्रीनवद्वीपधामका) विपुल ऐश्वर्य प्रकटित किया है, जिन्होंने श्रीगौरांगदेवकी महा-उदारता की कथाओं का सम्पूर्ण विश्व में प्रचार किया है एवं जिन्होंने अपने कृपापात्रों के हृदय में श्रीगौरपादपद्म की स्थापना की है, मैं उन श्रील प्रभुपाद के श्रीचरणकमलों में सदा-सर्वदा प्रणाम करता हूँ ।(5)
जो चैतन्यमहाप्रभु के आश्रितजनों के नित्य-आश्रयस्थल और जगदगुरु हैं, जो अपने गुरु, श्रीगौरकिशोर के सेवापरायण हैं एवं जो श्रीभक्तिविनोद ठाकुर के सम्बन्धमात्र से ही परम आदरयुक्त हैं, मैं उन श्रील प्रभुपाद के श्रीचरणकमलों में सदा-सर्वदा प्रणाम करता हूँ ।(6)
जो श्रीरूप, सनातन और रघुनाथ के कीर्तिरूपी झण्डे का उत्तोलनकर विराजमान हैं, अनेक लोग इस धरणीतलपर जिन्हें पाण्डित्य-प्रतिभामय जीव गोस्वामी से अभिन्न-तनु कहकर उनकी प्रशंसा किया करते हैं एवं जिनका श्रील कृष्णदास कविराज तथा ठाकुर नरोत्तम से सख्यभाव है, मैं उन श्रील प्रभुपाद के श्रीचरणकमलों में सदा-सर्वदा प्रणाम करता हूँ ।(7)
जीवों के प्रति असीम कृपाकर जो मूर्तिमान हरिकीर्त्तनरूपमें प्रकाशित हैं, जो धरणीके पापभारको दूर करने वाले गौरपार्षद हैं एवं जो जीवों के प्रति पिता से भी अधिक वात्सल्य के सुकोमल आकरस्वरूप हैं, मैं उन श्रील प्रभुपाद के श्रीचरणकमलों में सदा-सर्वदा प्रणाम करता हूँ।(8)
शरणागत किंकरों के लिए (अभीष्ट प्रदान करने में )जो कल्पतरु के समान हैं, जिनकी सहिष्णुता और उदारता वृक्षों को भी लज्जित करती है एवं वरदाताओं में श्रेष्ठ व्यक्ति भी जिनके दिव्य श्रीचरणकमलों की पूजा किया करते हैं, मैं उन श्रील प्रभुपाद के श्रीचरणकमलों में सदा-सर्वदा प्रणाम करता हूँ ।(9)
जो परमहंसकुल के चूड़ामणि हैं, जो परम पुरुषार्थ श्रीकृष्णप्रेम-सम्पत्ति के मालिक हैं, पतित जीवों के उद्घार के लिए जिन्होंने संन्यासीका वेश धारण किया है एवं श्रेष्ठ त्रिदण्डि संन्यासियों का समूह जिनके पादपद्मों की सेवा करता है, मैं उन श्रील प्रभुपाद के श्रीचरणकमलों में सदा - सर्वदा प्रणाम करता हूँ ।(10)
जो वृषभानुनन्दिनीके परमप्रिय अनुचर हैं, जिनकी चरण-रजको मैं अपने मस्तक पर धारण करने के सौभाग्य के लिए अभिमान करता हूँ, उन अद्भुत पावनीशक्तिसम्पन्न श्रील प्रभुपाद के श्रीचरणकमलों में मैं सदा-सर्वदा प्रणाम करता हूँ ।(11)