Bhajana Gīti
Kirtan

श्री श्रील माधवगोस्वामी-पादपद्मस्तवकैकादशकम्

Bhaktivinoda Ṭhākura4 min read
Guru TattvaKrishnaMahaprabhuHarinamBhakti
PDF
शतसज्जन वन्दित पादयुगं, युगधर्म प्रचारक धूर्यजनं।जनतासु सुभाषण शक्तिधरं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 1॥
अतिदीर्घ मनोहर गौरतनुं, मृदुमंद सुहास्य युतास्य धरं।उरुलम्बित हस्तसु रूपयुतं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 2॥
शिशुकालसु पाठ्यसु यत्न परं, जननी सविधे श्रुत शास्त्रमतं।परमार्थकृते परिहीन गृहं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 3॥
प्रभुपादपदेऽर्पित देह मतिं, गुरुकार्य कृते यति वेश धरं।प्रणतेषु सदाहितकारी वरं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 4॥

जिनके चरणयुगल सैकड़ों सज्जनों के द्वारा वन्दित हैं, जो युगधर्म के प्रचारक जनों में अग्रगण्य हैं, जो जनसमूह के बीच सुन्दर-भाषण की शक्ति रखते हैं, ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (1)

जिनका शरीर गौरवर्ण का विशाल तथा मनोहर है, जो मन्द-मन्द मुस्कान से हास्य को बिखेरते हुए मुख को धारण करने वाले हैं। जिनकी भुजाएं जांघों तक लम्बी हैं, तथा सुन्दरता से युक्त हैं, ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (2)

जो अपने बाल्यकाल से ही पढ़ने में तल्लीनता से युक्त थे, माता जी के पास ही जिन्होंने शास्त्रों के मतों को ग्रहण किया। परमार्थ के लिए जिन्होंने घर का परित्याग कर दिया था, ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (3)

प्रभुपाद के चरणों में जिन्होंने अपनी बुद्धि तथा शरीर को अर्पण कर दिया; जिन्होंने गुरु के कार्य के लिए यति (संन्यासी) का वेश धारण किया और जो शरण में आए हुए जनों के हित करने में तत्पर रहते हैं, ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (4)

प्रभुपादमनोमत कार्यरतं, सुसमादृत भक्तिविनोद पदं।रघुरूप सनातन लब्धपथं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 5॥
तरुधिकृत मार्जन शक्ति धरं, लघु सेवन मात्रकहृष्ट हृदं।हरिकीर्तन सन्तत दत्त मतिं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 6॥
मठमन्दिर निर्मित कीर्तिधरं, गुरुगौर कथासु च नित्य रतं।स्वयमाचरणे पर धैर्य परं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 7॥
करुणार्द्र हृदाहृत विष्णु जनं, जननन्दित वन्दित कृत्य कुलं।निज देश-विदेश सुवन्दय पदं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 8॥

प्रभुपाद के मनोऽनुकूल भक्ति-सिद्धांत के प्रचार में जो संलग्न रहे हैं, अत्यन्त आदरणीय श्रीभक्ति विनोद ठाकुर के चरणों का जिन्होंने अच्छी तरह से सम्मान किया और जिन्होंने श्रीरघुनाथदास गोस्वामी, श्रीरूप गोस्वामी व श्री सनातन गोस्वामी द्वारा बताये पथ का अनुसरण किया, ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (5)

जो सहनशीलता की शक्ति को धारण करने में वृक्ष से भी बढ़ कर हैं। लघु प्राणियों के सेवनमात्र से जिनका हृदय प्रसन्न रहता है, जो हरिकीर्तन में सदा व्यस्त रहते हैं, ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (6)

जो मठमन्दिर आदि के निर्माण की कीर्ति धारण करने वाले हैं; जो गुरु तथा गौरांग महाप्रभु की कथाओं में नित्य लगे रहने वाले हैं; जो स्वयं धर्माचरण तथा परमधैर्य को धारण करने वाले हैं; ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (7)

जो करुणा के द्वारा आर्द्र हृदय से विष्णु-भक्त को बुलाने वाले हैं; जिनका कुल प्रशंसित तथा वन्दित कृत्यों के द्वारा प्रख्यात है ; देश तथा विदेश में जिनके चरणों की वन्दना की जाती है, ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (8)

गुरु पंक्ति सुरक्षण यत्न परं, गुरुसोदरगौरव दान रतं।अनुरक्तसु सेवक वाक्य धरं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 9॥
भगवद्भजनेह्यनुराग परं, व्रत पालन कर्म सुदाठ्य युतं।प्रभुपाद पदोद्दृत कारि जनं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 10॥
कृपयाक्षमतामपराधि जनं, कलुषायुत सक्तसुदीन नरं।सुपथे परिचालय सर्व दिनं, प्रणमामि च माधव देव पदम्॥ 11॥

गुरुओं की गरिमा को, गुरुओं की पंक्ति में रहकर जो सुरक्षित रखने का प्रयत्न करते रहते हैं; जो गुरु-भाईयों को गौरव प्रदान करने में सदा लगे रहते हैं; जो अपने अनुरक्तों तथा श्रेष्ठ सेवकों के लिए वाक्यों को धारण करने वाले हैं; ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (9)

जो भगवद्-भजन में सदा अनुराग करने वाले हैं, जो अपने नियमों के पालन में सदा दृढ़ता का आचरण करने वाले हैं, प्रभुपाद के दर्शाए मार्ग से जिन्होंने कोटि-कोटि व्यक्तियों का उद्घार किया है; ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (10)

हम अपराधी जनों को क्षमा प्रदान करने की कृपा कीजिए। हम पापों से युक्त संसार में आसक्त दीन जन हैं, हमें सदा-सर्वदा श्रेष्ठ मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करने की कृपा करें, ऐसे श्रीमाधवदेव के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। (11)

Continue the Journey