Bhajana Gīti
Kirtan

हरि हरये नमः

Narottama Dāsa Ṭhākura2 min read
Guru TattvaKrishnaRadhaMahaprabhuNityanandaHarinam
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हरि हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः।यादवाय माधवाय केशवाय नमः॥ 1॥
गोपाल गोविन्द राम श्रीमधुसूदन।गिरिधारी गोपीनाथ मदनमोहन॥ 2॥
श्रीचैतन्य - नित्यानन्द श्रीअद्वैत सीता।हरि गुरु वैष्णव भागवत् गीता॥ 3॥
जय रूप सनातन भट्ट - रघुनाथ।श्रीजीव गोपाल भट्ट दास-रघुनाथ॥ 4॥
एइ छय-गोसाञिर करि चरण-वन्दन।याहा हैते विघ्रनाश अभीष्ट - पूरण॥ 5॥
एइ छय-गोसाञि याँर-मुइ ताँर दास।ताँ’ सबार पदरेणु मोर पन्च-ग्रास॥ 6॥
ताँदेर चरण सेवि भक्तसने वास।जनमे - जनमे हय एइ अभिलाष॥ 7॥
एइ छय गोसाञि यबे ब्रजे कैला वास।राधाकृष्ण-नित्यलीला करिला प्रकाश॥ 8॥
आनन्दे बलह हरि, भज वृन्दावन।श्रीगुरु - वैष्णव - पदे मजाइया मन॥ 9॥
श्रीगुरु-वैष्णव-पादपद्म करि आश।नाम - संकीर्त्तन कहे नरोत्तमदास॥ 10॥

तमाम इन्द्रियों व सांसारिक तापों को हरण करने वाले हरि को मेरा नमस्कार है। समस्त जीवों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले श्रीकृष्ण को नमस्कार है। यादव को, माधव को व केशव को मेरा नमस्कार है। गोपाल, गोविन्द, राम, श्रीमधुसूदन, गिरिधारी, गोपीनाथ, मदनमोहन, श्रीचैतन्य महाप्रभु, श्रीनित्यानन्द प्रभु, श्रीअद्वैताचार्य तथा अद्वैत-शक्ति श्रीसीता ठाकुरानी एवं हरि- गुरु-वैष्णव, श्रीमद्भागवत व श्रीमद्भगवद्गीता— सभी को नमस्कार। श्रीरूप गोस्वामी, श्रीसनातन गोस्वामी, श्रीरघुनाथ भट्ट गोस्वामी, श्रीजीव गोस्वामी, श्रीगोपाल भट्ट गोस्वामी तथा श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी — इन छः गोस्वामियों की जय हो। इन छः गोस्वामियों की मैं चरण वन्दना करता हूँ। कारण, इन छः गोस्वामियों की चरण वन्दना करने से तमाम विघ्र नाश हो जाते हैं तथा अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति होती है। ये छः गोस्वामी जिनके हैं, मैं उनका दास हूँ — इन सबकी चरण-रेणु ही मेरा पंच-ग्रास है, मैं इनके चरणों की सेवा करता रहूँ तथा भक्तों के साथ में मेरा वास हो। इन छः गोस्वामियों ने ब्रजवास किया तो राधाकृष्ण जी की नित्यलीलाओं का प्रकाश किया। आनन्द के साथ मन से हरि हरि बोलो तथा वृन्दावन का भजन करो तथा श्रीगुरु-वैष्णवों के श्रीचरणों में अपने को मशगूल कर दो। श्रीनरोत्तम ठाकुर जी कहते हैं कि श्रीगुरु- वैष्णवों के पादपद्मों की (कृपा-प्राप्ति की) आशा से मैं हरिनाम संकीर्तन करता हूँ।

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