Bhajana Gīti
Kirtan

तुमि सर्वेश्वरेश्वर

Bhaktivinoda Ṭhākura1 min read
Guru TattvaBhakti
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तुमि सर्वेश्वरेश्वर व्रजेन्द्र कुमार।तोमार इच्छाय विश्वे सृजन संहार॥ 1॥
तव इच्छामत ब्रह्मा करेन सृजन।तव इच्छामत विष्णु करेन पालन॥ 2॥
तव इच्छामत शिव करेन संहार।तव इच्छामत माया सृजे कारागार॥ 3॥
तव इच्छामत जीवेर जनम-मरण।समृद्धि-निपात, दुःख-सुख-संघटन॥ 4॥
मिछे मायाबद्ध जीव आशापाशे फिरे।तव इच्छा बिना किछु करिते ना पारे॥ 5॥
तुमि त’रक्षक आर पालक आमार।तोमार चरण बिना आशा नाहि आर॥ 6॥
निज-बल चेष्टा-प्रति भरोसा छाड़िया।तोमार इच्छाय आमि निर्भर करिया॥ 7॥
भक्तिविनोद अति दीन अकिंचन।तोमार इच्छाय ता’र जीवन-मरण॥ 8॥

हे व्रजेन्द्र कुमार! आप ही तमाम ईश्वरों के ईश्वर हो, आपकी इच्छा से ही विश्व का सृजन व संहार होता है। (1)आपकी इच्छा के मुताबिक ही ब्रह्माजी सृजन करते हैं, आपकी इच्छा के अनुसार ही विष्णु जी पालन करते हैं। (2)

आपकी इच्छा के मुताबिक ही शिवजी संहार करते हैं व आपकी इच्छा के अनुसार ही माया इस कारागार का सृजन करती है। (3) आपकी इच्छा के मुताबिक ही जीवों का जन्म-मरण, समृद्धि-पतन, व दुःख-सुख आदि सम्यक रूप से घटित होता है। (4) जीव फिज़ूल में ही आशा के पीछे फिरता है —परन्तु आपकी इच्छा के बिना कुछ नहीं कर पाता। (5) आप ही तो मेरे रक्षाकर्ता व पालनकर्ता हो। आपके चरणों को छोड़कर मेरी और कोई आशा नहीं है।(6) मैं अपने बल की चेष्टा का भरोसा छोड़कर आपकी इच्छा पर ही निर्भर रह रहा हूँ। (7) श्रीभक्तिविनोद ठाकुर जी कहते हैं कि मैं अति दीन-अकिंचन हूँ। आपकी इच्छा के मुताबिक ही मेरा जीवन-मरण है। (8)

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