वाञ्छाकल्पतरुभ्यश्च कृपासिन्धुभ्य एव च।पतितानां पावनेभ्यो वैष्णवेभ्यो नमो नमः ॥ 10 ॥
अपने आश्रितजनों की अभिलाषा पूर्ति के लिये कल्पवृक्षस्वरूप एवं कृपा के सिन्धुस्वरूप, तथा पतितजनों को पावन बनाने वाले वैष्णवों के लिये हमारा बारम्बार नमस्कार है।(10)
अपने आश्रितजनों की अभिलाषा पूर्ति के लिये कल्पवृक्षस्वरूप एवं कृपा के सिन्धुस्वरूप, तथा पतितजनों को पावन बनाने वाले वैष्णवों के लिये हमारा बारम्बार नमस्कार है।(10)
Bhajana Gīti
वन्देऽहं श्रीगुरोः श्रीयुतपदकमलं श्रीगुरून् वैष्णवांश्च,
Bhajana Gīti
ॐ अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
Bhajana Gīti
नमः ॐ विष्णुपादाय श्रीगौरप्रियमूर्तये।