Bhajana Gīti
Kirtan

राधाभजने यदि

Bhaktivinoda Ṭhākura2 min read
Guru TattvaKrishnaRadhaBhakti
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राधा - भजने यदि मति नाहि भेला।कृष्ण भजन तव अकारण गेला॥ 1॥
आतप - रहित सूरज नाहि जानि।राधा - विरहित माधव नाहि मानि॥ 2॥
केवल माधव पूजये, सो अज्ञानी।राधा - अनादर करइ अभिमानी॥ 3॥
कबँहि नाहि करबि ताँकर संग।चित्ते इच्छसि यदि व्रजरस - रंग॥ 4॥
राधिका - दासी यदि होय अभिमान।शीघ्रइ मिलइ तब गोकुल कान्ह ॥ 5॥
ब्रह्मा, शिव, नारद, श्रुति, नारायणी।राधिका - पदरज पूजये मानि ॥ 6॥
उमा, रमा, सत्या, शची, चन्द्रा, रुक्मिणी।राधा - अवतार सबे — आम्राय वाणी॥ 7॥
हेन राधा - परिचर्या याँकर धन।भकतिविनोद ताँर मागये चरण॥ 8॥

राधाजी के भजन में यदि रति-मति नहीं हुई तो समझो कि तुम्हारा कृष्ण-भजन तब बेकार ही चला गया। मेरी तो ऐसी धारणा है कि सूर्य जैसे ताप-रहित नहीं होता, उसी प्रकार राधा के बिना माधव भी नहीं होता। जो लोग केवल माधव की पूजा करते हैं, वे अज्ञानी हैं। सच तो यह है कि अभिमानी व्यक्ति ही राधा जी का अनादर करता है। हृदय में यदि ब्रज-प्रेम प्राप्त करने की इच्छा है तो कभी भी राधा जी को न मानने वाले या उनका अनादर करने वाले का संग मत करना। दूसरी ओर यदि यह बोध हो जाये कि मैं राधा जी की दासी हूँ तो शीघ्र ही गोकुल आनन्दवर्धक श्रीकृष्ण की प्राप्ति हो जाती है। ब्रह्माजी, शिवजी, नारद जी, श्रुतियाँ तथा लक्ष्मी जी राधाजी की चरण रज को पूज्य मानती हैं। उमा, रमा, सत्या, शची, चन्द्रा रुक्मिणी — ये सभी राधा जी के अवतार हैं — ऐसी आम्राय (वेद) वाणी है। इस प्रकार की राधा जी की सेवा ही जिनका धन है, श्रीभक्तिविनोद ठाकुर जी कहते हैं कि मैं उनके चरणों की सेवा चाहता हूँ।

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