राधाजी के भजन में यदि रति-मति नहीं हुई तो समझो कि तुम्हारा कृष्ण-भजन तब बेकार ही चला गया। मेरी तो ऐसी धारणा है कि सूर्य जैसे ताप-रहित नहीं होता, उसी प्रकार राधा के बिना माधव भी नहीं होता। जो लोग केवल माधव की पूजा करते हैं, वे अज्ञानी हैं। सच तो यह है कि अभिमानी व्यक्ति ही राधा जी का अनादर करता है। हृदय में यदि ब्रज-प्रेम प्राप्त करने की इच्छा है तो कभी भी राधा जी को न मानने वाले या उनका अनादर करने वाले का संग मत करना। दूसरी ओर यदि यह बोध हो जाये कि मैं राधा जी की दासी हूँ तो शीघ्र ही गोकुल आनन्दवर्धक श्रीकृष्ण की प्राप्ति हो जाती है। ब्रह्माजी, शिवजी, नारद जी, श्रुतियाँ तथा लक्ष्मी जी राधाजी की चरण रज को पूज्य मानती हैं। उमा, रमा, सत्या, शची, चन्द्रा रुक्मिणी — ये सभी राधा जी के अवतार हैं — ऐसी आम्राय (वेद) वाणी है। इस प्रकार की राधा जी की सेवा ही जिनका धन है, श्रीभक्तिविनोद ठाकुर जी कहते हैं कि मैं उनके चरणों की सेवा चाहता हूँ।