Bhajana Gīti
Kirtan

पुनः प्रार्थना

Narottama Dāsa Ṭhākura2 min read
Guru TattvaKrishnaMahaprabhuNityanandaBhakti
PDF
श्रीकृष्णचैतन्य प्रभु दया कर मोरे।तोमा बिना के दयालु जगत्-संसारे॥
पतितपावन - हेतु तव अवतार।मो सम पतित प्रभु ना पाइबे आर॥
हा हा प्रभु नित्यानन्द! प्रेमानन्द सुखी!कृपावलोकन कर आमि बड़ दुःखी॥
दया कर सीतापति अद्वैत गोसाईं।तव कृपा बले पाइ चैतन्य - निताई॥
दया कर गौर शक्ति पण्डित गदाधर।श्रीवासादि भक्तवृन्द मोरे दया कर॥
हा हा स्वरूप, सनातन, रूप, रघुनाथ।भट्टयुग, श्रीजीव, हा प्रभु लोकनाथ॥
दया कर श्रीआचार्य, प्रभु श्रीनिवास।रामचन्द्र संग माँगे नरोत्तमदास॥
दया कर प्रभुपाद श्रीदयित दास।तव पद छाया माँगे ए अधम दास॥
दया कर गुरुदेव पतितपावन।तव पद कृपा माँगे दीन अकिंचन॥

श्रीकृष्णचैतन्य महाप्रभु जी! मुझ पर दया कीजिए। आपको छोड़ और दयालु है ही कौन इस जगत् में। पतितों को पावन करने के लिये ही आपका अवतार हुआ है और मेरे जैसा पतित, प्रभु! आपको और कोई नहीं मिलेगा। हा! हा! नित्यानन्द प्रभो! आप तो हमेशा ही प्रेमानन्द में विभोर रहते हैं, मेरी ओर कृपा अवलोकन कीजिये। हे प्रभु! मैं बहुत दुःखी हूँ। हे सीतापति श्रीअद्वैत गोस्वामी! मुझ पर दया कीजिये। आपके कृपाबल से ही श्रीचैतन्य महाप्रभु और श्रीनित्यानन्द प्रभु की प्राप्ति होती है। हे गौर-शक्ति पण्डित गदाधर जी! मुझ पर दया करो। हे श्रीवासादि भक्तवृन्द! आप भी सभी मुझ पर दया करो। हा हा स्वरूप दामोदर प्रभु! हे सनातन गोस्वामी! हे श्रीरूप गोस्वामी ! हे रघुनाथ दास गोस्वामी! हे रघुनाथ भट्ट गोस्वामी! हे गोपाल भट्ट गोस्वामी! हे श्रीजीव गोस्वामी! हा लोकनाथ प्रभु! मुझ पर कृपा कीजिये। हे श्रीनिवास आचार्य प्रभु! आप मुझ पर दया कीजिये, ये नरोत्तम दास श्रीरामचन्द्र कविराज जी के संग की प्रार्थना करता है। [श्रीदयित दास प्रभुपाद जी! आप मुझ पर दया करें, ये अधमदास आपकी चरण-छाया की प्रार्थना करता है। पतित पावन श्रील गुरुदेव जी! मुझ पर दया कीजिए, ये दीन अकिंचन आपकी कृपा प्रार्थना करता है।]

Continue the Journey