हे प्रभो! ‘गौरांग’ उच्चारण करने मात्र से कब मेरा शरीर पुलकायमान होगा, हरि-हरि कहते-कहते कब मेरे नेत्रों से अश्रु-धारायें प्रवाहित होंगी तथा कब नित्यानन्द प्रभु की मुझ पर करुणा होगी, जिस करुणा से मेरी तमाम सांसारिक वासनायें तुच्छ हो जाएँगी? विषयों को त्याग कर कब मेरा मन शुद्ध होगा तथा कब मैं वृन्दावन का दर्शन कर पाऊँगा? श्रीरूप गोस्वामी व श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी के चरण-कमलों में, मैं कब व्याकुलता लाभ करूँगा तथा कब मैं उन श्रीराधा-कृष्ण की युगल प्राप्ति के तत्त्व को समझ पाऊँगा? श्रील नरोत्तम दास ठाकुर जी हमेशा यही प्रार्थना करते रहते हैं कि श्रीरूप गोस्वामी जी व श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी जी के श्रीचरणों में मेरी आशा बनी रहे अर्थात श्रीरूप गोस्वामी जी व श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी जी की कृपा से ही व श्रीगुरु-वैष्णव कृपा से ही मेरी उपरोक्त सभी इच्छाएँ पूर्ण हो पायेंगी।