‘गौरांग’ बलिते हबे पुलक शरीर।‘हरि-हरि’ बलिते नयने ब’बे नीर॥
आर कबे निताइचाँदेर करुणा हइबे।संसार वासना मोर कबे तुच्छ हबे॥
विषय छाड़िया कबे शुद्ध हबे मन।कबे हाम हेरब श्रीवृन्दावन॥
रूप - रघनाथ - पदे हइबे आकुति।कबे हाम बुझव से युगल-पीरिति॥
रूप - रघुनाथ - पदे रहु मोर आश।