Bhajana Gīti
Kirtan

एइबार करुणा कर वैष्णव

Narottama Dāsa Ṭhākura1 min read
KrishnaRadhaHarinamBhakti
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एइ बार करुणा कर वैष्णव गोसाञि।पतित-पावन तोमा बिने केह नाइ ॥ 1॥
काहार निकटे गेले पाप दूरे याय।एमन दयाल प्रभु केबा कोथा पाय?॥ 2॥
गंगार परश हइले पश्चाते पावन।दर्शने पवित्र कर एइ तोमार गुण॥ 3॥
हरिस्थाने अपराधे तारे’ हरिनाम।तोमा-स्थाने अपराधे नाहिक एड़ान॥ 4॥
तोमार हृदये सदा गोविन्द-विश्राम।गोविन्द कहेन मम वैष्णव प्राण॥ 5॥
प्रति जन्मे करि आशा चरणेर धूलि।नरोत्तमे कर दया आपनार बलि’॥ 6॥

हे वैष्णव गोसाईं! आप इस बार मुझ पर करुणा कीजिये, आपको छोड़ कर और कोई भी पतित-पावन नहीं है। (1) किसके पास जाने से मेरे पाप दूर होंगे? ऐसा, अर्थात् आप जैसा, दयालु प्रभु किसको और कहाँ मिलेगा? (2) गंगा जी का स्पर्श करने के बाद पावन हुआ जाता है परन्तु आप तो दर्शन से ही पवित्र कर देते हैं। (3) भगवान् श्रीहरि के प्रति यदि कोई अपराध हो जाये तो हरि से अभिन्न हरिनाम उद्घार कर देता है परन्तु हे वैष्णव ठाकुर! यदि आपके प्रति अपराध हो जाए तो उसका और कोई परित्राण नहीं है। (4) हे वैष्णव ठाकुर! आपके हृदय में हमेशा गोविन्द जी का अवस्थान रहता है। साक्षात् गोविन्द जी भी कहते हैं कि वैष्णव मेरे प्राण हैं। (5) श्रीनरोत्तम दास जी कहते हैं कि मैं प्रत्येक जन्म में आपके चरणों की धूलि की आशा करता हूँ। आप अपना जन जानकर मुझ पर कृपा कीजिये। (6)

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