Bhajana Gīti
Kirtan

शुनियाछि साधु मुखे

Narottama Dāsa Ṭhākura1 min read
MahaprabhuBhakti
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शुनियाछि साधु मुखे बले सर्वजन।श्रीरूप - कृपाय मिले युगल-चरण ॥ 1॥
हा हा प्रभु सनातन गौर-परिवार।सबे मिलि’ वाञ्छा पूर्ण करह आमार॥ 2॥
श्रीरूपेर कृपा येन आमा प्रति हय।से पद आश्रय यार, सेई महाशय॥ 3॥
प्रभु लोकनाथ कबे संगे लइया याबे।श्रीरूपेर पादपद्मे मोरे समर्पिवे॥ 4॥
हेन कि हइबे मोर — नर्मसखीगणे।अनुगत नरोत्तमे करिबे शासने ॥ 5॥

मैंने साधुओं के मुख से सुना है, और सब लोग भी कहते हैं कि श्रीरूप गोस्वामी जी की कृपा से उन युगल चरणों की प्राप्ति होती है। (1) हा! हा! प्रभो सनातन! हे गौर परिवार! आप सभी मिल कर मेरी अभिलाषा को पूर्ण कीजिये। (2) आप सब ऐसी कृपा कीजिये, जैसे श्रीरूप गोस्वामी जी की मेरे प्रति कृपा हो जाये। उनके चरणों का जिसने आश्रय लिया है, वही महापुरुष है। (3) श्रीलोकनाथ प्रभु कब मुझे अपने साथ ले जायेंगे और श्रीरूप गोस्वामी जी के पादपद्मों में समर्पित कर देंगे? (4) श्रीनरोत्तम दास ठाकुर जी कहते हैं कि क्या मेरे साथ कभी ऐसा भी होगा कि नर्मसखीगण मुझे शासन करके अपने अनुगत कर लें? (5)

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