Bhajana Gīti
Kirtan

श्रीरूप मंजरी-पद

Narottama Dāsa Ṭhākura2 min read
Guru TattvaKrishnaBhakti
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श्रीरूपमंजरी-पद,सेई मोर सम्पद,सेइ मोर भजन-पूजन।सेइ मोर प्राण-धन,सेइ मोर आभरण,सेइ मोर जीवनेर जीवन॥ 1॥
सेइ मोर रसनिधि,सेइ मोर वाञ्छासिद्धि,सेइ मोर वेदेर धरम।सेइ व्रत, सेइ तप,सेइ मोर मन्त्र जप,सेइ मोर धरम-करम॥ 2॥
अनुकूल हबे विधि,से-पदे हइबे सिद्धि,निरखिब ए दुइ नयने।से रूप-माधुरीराशि,प्राण-कुलवय-शशी,प्रफुल्लित हबे निशि-दिने॥ 3॥
तुया-अदर्शन-अहि,गरले जारल देहि,चिर दिन तापित जीवन।हा हा प्रभु! कर दया,देह मोरे पदछाया,नरोत्तम लइल शरण॥ 4॥

श्रीरूप मंजरी* के श्रीचरण ही मेरी सम्पत्ति हैं, वे ही मेरा भजन- पूजन हैं। वे ही मेरे प्राण-धन हैं, वे ही मेरे आभरण हैं। वे ही मेरे जीवन के जीवन हैं। (1) वे ही मेरी रस-निधि हैं, वे ही मेरी वान्छा-सिद्धि हैं, वे ही मेरे वेद-धर्म स्वरूप हैं। वे ही मेरा व्रत हैं। वे ही मेरी तपस्या हैं, वे ही मेरे मन्त्र जप हैं, वे ही मेरे धर्म-कर्म हैं। (2) जब कभी विधि अनुकूल होगा, तब ही मेरी उन चरणों में सिद्धि होगी और तब मैं उनका इन दोनों नेत्रों से दर्शन करूँगा अर्थात् नयन भर कर दर्शन करूँगा। उस अपार रूप-माधुरी को देख कर मेरे प्राण रूप कुमुद रात-दिन प्रफुल्लित होंगे। (3) आपके अदर्शन रूप सर्प के विष से यह शरीर जला जा रहा है जिससे मेरा ये जीवन चिरकाल से तापित है। श्रीनरोत्तम दास ठाकुर जी कहते हैं —हा! हा! प्रभो!! मुझ पर दया कीजिये, मुझे अपने श्रीचरणों की छाया प्रदान कीजिये। मैंने आपकी शरण ग्रहण की है। * चूंकि श्रीरूप गोस्वामी जी भगवान श्रीकृष्ण की लीला की श्रीरूप मंजरी हैं इसलिए यहाँ पर श्रीरूप मंजरी पद का अर्थ श्रीरूप गोस्वामी जी के चरण कमल हैं अथवा श्रीरूप गोस्वामी जी से अभिन्न श्रीगुरुदेव के चरण कमल हैं।

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