Bhajana Gīti
Kirtan

चलो सखी वहाँ

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
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चलो सखी वहाँ चालिये जहाँ बसत ब्रजराज।गोरस बेचत हरि मिलें एक पन्थ दो काज॥बृज चौरासी कोस में, चार गाँव निज धाम।वृन्दावन और मधुपुरी, बरसानों नन्दगांव॥मुक्ति कहत गोपाल सों मेरी मुक्ति बताए।ब्रज रज उड़ मस्तक लगे मुक्ति मुक्त ह्वै जाय॥जय जय श्रीराधारमण, जय जय नवलकिशोर।जय गोपी चितचोर प्रभु, जय जय माखनचोर॥ब्रज रज में ये रज मिलि, रज में यमुना नीर।धन्य भाग्य वा जीव के, जो जामें तजे शरीर॥राधा राधा कहत ही सब व्याधा मिट जाय।कोटि जनम की आपदा, नाम लिये सों जाय॥

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