Kirtan
ब्रज के पद
Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaRadhaJagannathBhakti
वृन्दावन सों वन नहीं, नन्दगाँव सों गाँव।वंशीवट सों वट नहीं, कृष्ण नाम सों नाम॥मेरी भव बाधा हरो राधा नागरि सोय।जा तन पै झाँई पड़े श्याम हरित द्युति होय॥राधा मेरी स्वामिनी, मैं राधे को दास।जनम-जनम मोहे दीजियो, श्रीवृन्दावन को वास॥सब द्वारन कौ छाँड़ के, मैं आयो तेरे द्वार।श्रीवृषभानु की लाड़ली, जरा मेरी ओर निहार॥वृन्दावन के वृक्ष कों मरम न जाने कोय।डाल-डाल और पात-पात में श्रीराधे-राधे होय॥राधा राधा नाम को , जो सपने में जो लेत।ताकूँ मोहन साँवरो, झट अपनों कर लेत॥