चारों ललवा प्रकट भये आज, अवध में लडुवा बँटे।लडुवा बँटे मीठे मेवा बँटे झीनी झीनी उड़े रे गुलाल।बँदनवार बँधावो मोरी बहना परदे लगावो जरी हार॥मोतियन चौक पुरावो मोरी बहिना, सुवरण कलश सजाय।केसर कस्तूरी की भर दो तलैया बरसा दो मूसलाधार॥गैया के दूध की खीर घुटावो ब्राह्मण जिमावो अपार।छटी पुजावो गीत सब गावो मोहरों की कर दो उछाल॥