कहाँ कृष्ण प्राणनाथ मुरलीवदनकहाँ जाउँ कहाँ पाऊँ व्रजेन्द्रनन्दन।काहरे कहिब कथा केबा जाने मोर दुःख,व्रजेन्द्रनन्दन बिना फाटे मोर बुक॥
नन्द के आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की।हाथी दीन्हें, घोड़ा दीन्हें और दीन्हीं पालकी॥
रतन दीन्हें, हार दीन्हें, गैया ब्याई हालकी।कंठा और कढूला दीन्हें, मुक्ता दीन्हीं माल की॥
कढ़े दीन्हें, छड़ें दीन्हीं, बिन्दी दीन्हीं भाल की।सुरमा दिये, दर्पण दिये, कंघी दीन्हीं बाल की॥
जय यशोदा लाल की, जय दाऊ दयाल की।जय बोलो गोपाल की॥
ओ मइया तेरे द्वारे यशोदा तेरे द्वारे बाला जोगी आयो, बाला जोगी आयो अंग विभूति गले रुद्रमाला शेष नाग लिपटायो। ओ मैया . . . . . . . . . बाँको तिलक भाल चन्द्रमा घर घर अलख जगायो। ओ मैया . . . . . . . . . लेकर भिक्षा चली नंदरानी कंचन थाल भरायो लो भिक्षा जोगी जाओ आसन पर मेरो बालक डरायो। ओ मैया . . . . . . . . . न चहिये तेरी दौलत दुनियाँ, न ये कंचन माया अपने बालक को दर्शन करादे मइया मैं दर्शन को आया। ओ मैया . . . . . . . . . श्रीकृष्ण शरणं मम बोलो श्रीकृष्ण शरणं मम, पंच देव परिक्रमा करके शिंगी नाद बजायो सूरश्याम बलिहारी कन्हैया जुग जुग जियो तेरो जायो। ओ मैया . . . . . . . . .