ये प्रेम सदा भरपूर रहे, गुरुदेव तुम्हारे चरणों में।यह अरज़ मेरी मंज़ूर रहे, गुरुदेव तुम्हारे चरणों में॥
जीवन की मैंने सौंप दी है, अब डोर तुम्हारे हाथों में।उद्धार पतन अब मेरा है, गुरुदेव तुम्हारे चरणों में॥
संसार असार है सार नहीं, बाकी न रही अब भूख कहीं।मैं हूँ संसार के बंधन में, संसार तुम्हारे चरणों में॥
आँखों में सदा यह ध्यान रहे, और मन चरणों में लगा रहे।यह अन्त समय की अरज़ी है, गुरुदेव तुम्हारे चरणों में॥
यह बार-बार विनय करता हूँ, आगे तुम्हारी मरज़ी है।यह माँग सभी भक्तों की है, गुरुदेव तुम्हारे चरणों में॥