नित नहाने हरि मिलें, तो जल जन्तु होइ।फल, मूल खाकर हरि मिलें, तो बहुत बादुर बदराइ॥ 1॥तृण खाकर हरि मिलें, तो बहुत मृगी अजा।स्त्री छोड़कर हरि मिलें, तो बहुत रहे हैं खोजा॥ 2॥दूध पीकर हरि मिलें, तो बहु वत्स बाला।मीरा कहे बिना प्रेम से, नहिं मिले नन्दलाला॥ 3॥